आर्द्रक - शुण्ठी

Botanical name - Zingiber officinale

Family Zingiberaceae

English name - Ginger

पर्याय शुण्ठी, नागर, श्रृंगवेर, विश्वभेषज, महौषध, आर्द्रक (कच्चा कन्द गीला होने से कहते हैं।) कटुभद्र।

क्षेत्रीय नाम सोठ, सूंठी, (कच्चे कन्द को अदरख कहते हैं।)

स्वरूप

कन्दयुक्त बहुवर्षायु क्षुप होता है। इसका पत्र युक्त काण्ड 2 से 4 फुट ऊंचा होता है।

पत्र वृंत हीन 10 से 15 सेमी लम्बे तथा लगभग 3 सेमी चौडे होते हैं, फल सम्पुटिका आयताकार होते हैं।

उत्पत्ति स्थान

दक्षिणी भारत तथा हिमालय प्रदेश में इसकी खेती होती है।

शुण्ठी निर्माण विधि

अदरख की त्वचा को हटाकर 10-12 दिन तक प्रथम धूप में पश्चात् छाया में सुखा लें। पश्चात् अदरक को एक दिन पानी में डूबोने के बाद गाढ़े चूने के पानी में रख देते हैं इसके बाद फिर धूप में सूखाकर खुरदरे वस्त्र या बोरी के (टाट) टुकड़ो से रगड़ देते हैं। जिससे टुकडों पर सफेदी और चमक आ जाती है। यही शुण्ठी कहलाती है।

रस पंचक

वीर्य - उष्ण ।

विपाक मधुर (शुण्ठी), कटु, (आर्द्रक)।

गुण (शुण्ठी) लघु, स्रिग्ध, (आर्द्रक) गुरू, रूक्ष, तीक्ष्ण।

रस - कटु ।

कर्म एवं आमयिक प्रयोग

कफ वात शामक होती है शुण्ठी उत्तम आम पाचन, दीपन तथा अनुलोमक होने से अग्निमांद्य, अजीर्ण तथा कोण्ठ वात में बहुत उपयोगी है।

रूक्त वह संस्थान को उत्तेजित करती है। तथा हदय सम्बन्धि विकारों में उत्तम है।

कफघ्न तथा श्वासहर होने से श्वसन तंत्र सम्बन्धी विकारों (श्वास, कास, प्रतिश्याय) में शुण्ठी पाक का उपयोग करते हैं। आमवात में तथा वाजीकरणार्थ यह उत्तम औषध है।

अदरक और लहसुन को बराबर की मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में पानी से सेवन कराएं।

पिसी हुई सोंठ एक ग्राम और जरा-सी हींग और सेंधानमक की फंकी गर्म पानी से लेने से उदर शूल ठोक हो जाता है।

एक चम्मच पिसी हुई सोंठ और सेंधानमक एक गिलास पानी में गर्म करके पीने से उदर दर्द, कब्ज, अपच ठीक हो जाते हैं।

अदरक और पुदीना का रस 10-10 मिली. लेकर उसमें एक ग्राम सेंधानमक डालकर पीने से उदर शूल में तुरन्त लाभ होता है।

अदरक का रस 5 मिलीलीटर, नींबू का रस 5 मिलीलीटर, कालीमिर्च का चूर्ण 1 ग्राम को मिलाकर पौने से उदर का शूल समाप्त होता है।

हिक्का

सोंठ के चूर्ण का नस्य देना चाहिये।

एक चम्मच अदरक का रस एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती हैं।

दंत शूल

महीन पिसा हुआ सेंधानमक अदरक के रस में मिलाकर शूल वाले दांत पर लगाएं। दांतों में अचानक शूल होने पर अदरक के छोट-छोटे टुकड़े को छीलकर शूल वाले दांत के नीचे दवाकर रखें।

सर्दी की वजह से दांत के शूल में अदरक के टुकड़ों को दांतों के बीच दबाने से लाभ होता है।

है।

भूख की कमी

अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में भिगोकर इसमें सेंधानमक मिला लें, इसे भोजन करने से पहले नियमित रूप से खिलाएं।

प्रतिश्याय, कास

पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिलाएं।

शुष्क कास

अदरक के टुकडों को तवे पर सेककर सेंधा नमक मिलाकर चूसना उत्तम है

आमवात व संधीवात सोंठ 1 भाग तथा, अश्वगंधा 4 भाग मिला कर सेवन करना चहिये।

गला खराब होना अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें।

विशिष्ट योग

सौभाग्य शुण्ठी पाक, आर्द्रकखण्ड, शुण्ठी पानक, पंचसम चूर्ण, आर्द्रक रसायन।

प्रयोज्यांग

कन्द

मात्रा

शुण्ठी चुर्ण-1-2 ग्राम, आर्द्रक स्वरस 10-15 मिलीलीटर।

Contraindicate - उष्ण तीक्ष्णता के कारण आर्द्रक का अधिक प्रयोग ग्रीष्म, शरद ऋतु तथा पित्त प्रकृति पुरूष को नहीं करना चाहिए।