आमलकी
Botanical Name - Phyllanthus emblica
Family - Euphorbiaceae
English name - Indian goose berry
पर्याय धात्री, षड्सा, अमृतफल, धात्रीफल,
वयः स्था।
क्षेत्रीय नाम आंवला।


स्वरूप
मध्यमाकार वृक्ष पत्र इमली जैसे होते हैं। फल गोल ½ से 1 इंच हरीताभ होते हैं।
जाति
1. वन्य (छोटे फल)
2. ग्राम्य (बडे फल)
उत्पत्ति स्थान
भारत में सर्वत्र मिलता है।
रस पंचक
वीर्य - शीत।
विपाक - मधुर।
गुण - गुरू, शीत।
रस - लवण रहित पंचरस युक्त अम्ल प्रधान
कर्म एवं आमयिक प्रयोग
त्रिदोष नाशक होने से त्रिदोष विकारों में प्रयुक्त विशेषतः पित्त नाशक। नेत्र तथा केशों के लिए उत्तम है। यकृत विकार, अतिसार, स्कर्वी, रक्त वमन, ज्वर, अम्लपित्त तथा परिणामशूल में बहुत उपयोगी है।
उत्तम रसायन, दाहनाशक, तथा कुष्ठ नाशक है। मूत्रकृच्छ्र तथा प्रदर रोगों में भी स्वरस देते हैं।
बालों के रोग
वले का चूर्ण पानी में भिगोकर रात्रि में रख दें। सुबह इस पानी से रोजाना वाल धोने उनकी जड़े मजबूत होंगी, उनकी सुंदरता बढ़ेगी और मेंहदी मिलाकर बालों में लगाने से वे काले हो जाते हैं।
मूत्र दाह
आधा कप आंवले के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
हरे आंवले का रस 50 मिलीलीटरए शक्कर या शहद 25 ग्राम थोड़ा पानी मिलाकर सुबह-शाम पीएं। दाह और कब्ज ठीक होगी। इससे शीघ्रपतन भी दूर होता है।
हकलाहट, तुतलापन
बच्चे को । ताजा आंवला रोजाना कुछ दिनों तक चबाने के लिये दें। इससे हकलाना और तुतलापन दूर होता है।
हकलाने और तुतलाने पर कच्चे, पके हरे आंवले को कई बार चूस सकते हैं।
रक्तस्त्राव
स्राव वाले स्थान पर आंवले का ताजा रस लगाएं, स्राव बंद हो जाएगा।
धातुवर्द्धक (वीर्यवृद्धि)
एक चम्मच घी में दो चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में 3 बार कम- से-कम 7 दिनों तक ले सकते हैं।
मूत्र रुकने पर
कच्चे आंवलों को पीसकर बनी लुग्दी पेडू पर लगाएं।
आंखों (नेत्र) के रोग
लगभग 20-50 ग्राम आंवले के फलों को अच्छी तरह से पीसकर 2 घंटे तक 500 मिलीलीटर ग्राम पानी में उबालकर उस जल को छानकर दिन में 3 बार आंखों को धोने से आंखों के रोगों में बहुत लाभ होता है।
आंवले का रस पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। आंवले के साथ हरा धनिया पीसकर खाने से भी आंखों के रोग में लाभ होता है।
सुन्दर बालों के लिए
सूखे आंवले 30 ग्राम, बहेड़ा 10 ग्राम, आम की गुठली की गिरी 50 ग्राम और लौह भस्म 10 ग्राम, रात भर कढाई में भिगोकर रखें। बालों पर इसका रोजाना लेप करने से छोटी आयु में सफेद हुए बाल कुछ ही दिनों में काले पड़ जाते हैं।
आंवले, रीठा, शिकाकाई तीनों का काढ़ा बनाकर शिर धोने से बाल मुलायम, घने और लम्बे होते हैं।
आवाज का बैठना
अजमोद, हल्दी, आंवला, यवक्षार, चित्रक इनको समान मात्रा में मिलाकर, 1 से 2 ग्राम चूर्ण को 2 चम्मच मधु और 1 चम्मच घी के साथ चाटने से आवाज का बैठना ठीक हो जाता है।
एक चम्मच पिसे हुए आंवले को गर्म पानी से फंकी लेने से बैठा हुआ गला खुल जाता है और आवाज साफ आने लगती है।
कच्चे आंवले बार-बार चूस चूसकर खाएं।
आंवले के 10-20 मिलीलीटर रस और 2-3 ग्राम पीपल का चूर्ण, 2 चम्मच शहद के साथ दिन में सुबह और शाम सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
आंवले के मुरब्बे की चाशनी के सेवन से हिचकी में बहुत लाभ होता है।
वमन (वमन)
हिचकी तथा वमन में आंवले का 10-20 मिलीलीटर रस, 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से लाभ होता है। इसे दिन में 2-3 बार लेना चाहिए। केवल इसका चूर्ण 10-50 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ भी दिया जा सकता है।
आंवले के 20 मिलीलीटर रस में एक चम्मच मधु और 10 ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण मिलाकर पिलाने से वमन (वमन) बंद होती है।
शिरः शूल, अम्ल पित्त
-5 ग्राम आंवले का चूर्ण, घी तथा शक्कर के साथ सेवन करना चाहिये।
आंवले का फल खाने या उसके पेड़ की छाल और पत्तों के काढ़े को 40 मिलीलीटर सुबह और शाम पीने से गर्मी की वमन और अतिसार बंद हो जाते हैं।
उच्च रक्त चाप आंवला, सर्पगंधा, गिलोय चूर्ण सम मात्रा में पानी के साथ लेना उत्तम है।
विशिष्ट योग
च्यवनप्राश, ब्रह्मरसायन, आमलक्यादि चूर्ण, धात्री लोह।
प्रयोज्यांग
फल
मात्रा
चूर्ण 3 से 6 ग्राम। स्वरस 10-20 मिलीलीटर।
रसायनिक संगठन
विटामीन C का सर्वोत्तम वानस्पतिक स्रोत है। नांरगी से 10 गुना अधिक Vit. C होता है। गैलिक एसिड टैनिक एसिड, तथा सेलूलोज भी पाये जाते हैं।