बाकुची
Botanical Name - Psoralia corylifolia
Family - Fabaceae
English Name - Psoralia Seeds
पर्याय - वाकुची, कुष्ठघ्नी, पूतिफली, अवलगुज, कृष्णफला, सोमराजी, शशिलेखा।
क्षेत्रीय नाम - बावची।


स्वरूप
वर्षायु क्षुप होता है। पत्र लगभग 3 इंच लम्बे पुष्प बैंगनी होते हैं। फल कृष्ण वर्ण के छोटे होते हैं। फल के अन्दर बीज होते हैं। जिनको मसलने पर गंध निकलती है।
उत्पत्ति स्थान
प्रायः समस्त भारत में तथा मुख्यतः राजस्थान तथा पंजाब में होती है।
Our team
Our strength lies in our individuality. Set up by Esther Bryce, the team strives to bring in the best talent in various fields, from architecture to interior design and sales.
रस पंचक
वीर्य - उष्ण।
विपाक - कटु ।
गुण लघु, रूक्ष।
रस - तिक्त, कटु ।
कर्म एवं आमयिक प्रयोग
कफ वातिक विकारों में प्रयुक्त।
उत्तम कुष्ठघ्न होने से श्वित्र तथा त्वक विकारों में इसका बहुत उपयोग होता है।
उष्ण कटु होने से अग्निमांद्य तथा आमदोष तथा पाचन सम्बन्धि विकारों में लाभदायक है।
कृमिघ्न है विशेषतः गण्डुपद कृमी में इसका सेवन करते हैं।
नाड़ी दौर्बल्य, श्वास, कास तथा क्लैव्य में भी उपयोगी है।
श्वास
आधा ग्राम बावची के बीजों को पीसकर चूर्ण बनाकर अदरक के रस के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करने से कास में लाभ मिलता है। इससे कफभी बाहर निकल जाता है।
श्वित्र
वाकुची बीज चूर्ण 3 ग्राम, पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करें।
पीलिया 10 मिलीलीटर पुनर्ववा के रस में आधा ग्राम पिसी हुई वावची के बीजों का चूर्ण मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से पीलिया के रोग में लाभ होता है।
अर्श
2 ग्राम हरड़, 2 ग्राम सौंठ और 1 ग्राम बावची के बीज को पीसकर रख लें। इसे आधे चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अर्श के रोग में लाभ होता है।
कुष्ठ
कुष्ठ 3-3 ग्राम बाकुची और तिल को मिलाकर थोड़ा सा पीसकर सुबह और शाम पानी के साथ खाने से कुष्ठ (कोढ़) का असर समाप्त हो जाता है लेकिन इसको कम से कम 7-8 महीने तक खाना चाहिए।
25 ग्राम बाकुची के बीज, 25 ग्राम श्वेत (सफेद) मूसली और 25 ग्राम चित्रक को एक साथ पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से 4 ग्राम चूर्ण शहद के साथ सुबह और शाम खाने से कुष्ठ (कोढ़) के रोग में बहुत लाभ आता है।
त्वक रोग
बाकुची तैल का स्थानिक प्रयोग लाभकारी है।
विशिष्ट योग
बाकुची चूर्ण, बाकुची तैल।
प्रयोज्यांग
बीज, बीज तैल।
मात्रा
चूर्ण 1 से 3 ग्राम।
शोधन
बाकुची के बीज गोमूत्र या आर्द्रक स्वरस में 7 दिन रखने से शुद्ध हो जाते हैं।
रासायनिक संगठन
मुख्यतः bakuchiol, psoralen, isopsoralen, psorelidin, corylifolin तथा isopsoralidin पाये जाते हैं।
अहित प्रभाव
बीज चूर्ण अधिक से मात्रा में लेने से हल्लास, छर्दि तथा शिर शूल हो सकता है।